Pages

Sunday, 23 March 2014

नटराज (Natraja)

प्रबाल पाल प्रचंड प्रभुत्व
प्रधान प्रकर्ष प्रकांड हो
प्रखर प्रमुख प्रगत प्रमथ
प्रमृष्ट प्रधान-भाग हो

विभूत भूत और भभूत
चण्ड मुण्ड आभूष हो
भंग भूर धतूर दूध
उपज फूल विभूष हो

है गल चढ़ा भुजंग नाग
मृदुंग नाद मलंग हो
है चोटी चन्द्र और गंग
कंठ नील रंग हो

तृती नयन हो प्रकट
कुपित अगर क्लेष्ठ हो
समस्त जीव जंत में
नटराज तुम श्रेष्ठ हो
महादेव तुम श्रेष्ट हो

हर हर महादेव! 


- पीयूष 'गुमशुदा' आसवानी

1 comment: