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Friday, 15 February 2013

तेरी ज़ुल्फ़ का एक बाल (A Hair From Your Head)

तेरी ज़ुल्फ़ का एक बाल
छूट गया मेरे अकेले सिरहाने पे
यूँ लगा मेरी करवटों को
एक हमनफज़ साथी मिल गया

तेरी इत्र की ज़रा सी खुशबू
छूट गयी मेरे कमरे के गुमनाम कोनों में
यूँ लगा चंद बेजान दीवारें
वादियों का सफ़र कर आईं

तेरी मीठी आवाज़
छूट गयी मेरे परेशान कानों में
यूँ लगा मेरे बेआबरू ज़हन को
शर्म का सहारा मिल गया

तेरा पसीने से भीगा रुमाल
छूट गया मेरी खाली जेब में
यूँ लगा मेरे खुले सर पर
एक गुमनाम साया चढ़ गया

और छूट गई
तेरी एक टहलती, पुरानी याद
मेरी थकी, भरभराती आँखों में
यूँ लगा मेरी अधूरी, बेपाक नींद को
एक पूरा, सुन्दर सपना मिल गया

- पीयूष 'गुमशुदा' आसवानी